Monday, March 16, 2009

चौदहवीं के ये चाँद

चुनाव के नगाड़े बज रहे हैं, हर तरफ़ धूम मची है। चुनाव की चर्चा में बाकी काम ठप्प पड़ने लगे हैं। ऐसे में कलाजगत भला कैसे शांत बैठ जाए, सवाल दर सवाल हैं और जवाब आधे-अधूरे। चौदहवीं लोकसभा में कलाजगत के भी नुमाइंदे थे। राजबब्बर, धर्मेन्द्र, जयाप्रदा, गोविंदा जैसे कलाकार वहां थे। लोकसभा की वेबसाइट बताती है कि अन्तिम सत्र को छोड़कर जितने भी सत्र हुए, कला उपेक्षित रही। आंकडे निराशा पैदा करते हैं। राजबब्बर और जयाप्रदा की सत्रों में पर्याप्त हिस्सेदारी रही, लेकिन धर्मेन्द्र और गोविंदा ने अपने मतदाताओं को दुखी ही किया। उनकी पार्टी भी आजिज़ आ गयीं, धर्मेन्द्र की लोकसभा सीट बीकानेर में तो गुमशुदगी के पोस्टर भी चिपक गए। कला के प्रति सदस्यों की दिलचस्पी बेहद कम रही। निजी विधेयक पेश करना तो दूर की बात है, ये माननीय सदस्यगण सरकारी विधेयकों पर चर्चा में भी शामिल नही हुए। इन कलाकारों में सर्वाधिक सक्रिय सांसद राजबब्बर की भी रूचि कला से इतर अन्य मामलों में रही। करने को बहुत-कुछ था, कला की दुनिया में तमाम काम किए जाने की जरूरत थी। कला के उन्नयन को सरकारी मदद की और आवश्यकता है, लोक और जनजातीय कला दम तोड़ रही हैं। प्रतिभाएं भुखमरी के कगार पर हैं। साहित्य और ललित कला एकेडेमी जैसी सरकारी इकाइयाँ मनमर्जी पर उतारूं हैं। जिसे चाहा, अवार्ड थमा दिया और मनमर्जी से अनुदान बाँट दिया। यहाँ तक कि exhibitions तक आयोजित करने में पक्षपात है, कोई बार-बार मौका पा रहा है तो कोई चक्कर लगा-लगाकर बेहाल। जो होना चाहिए, वो नहीं हो रहा। सरकारी स्तर पर कहीं भी, कुछ पटरी पर नहीं। लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों की विधानसभाओं में बैठे हमारे प्रतिनिधि कुछ नहीं कर रहे। यह जनप्रतिनिधि कभी अंकुश कहे जाते थे, इनकी धार कुंद पड़ गई है। सिर्फ़ ये कहकर कि सियासत गन्दी चीज़ है, कन्नी काट लेने वाले हम कलाकार अब निराशा महसूस कर रहे हैं। हम कलाकार, साहित्यकार या रंगमंच के प्रतिनिधि जनता से सीधे जुडे हैं, जानते हैं कि कलाजगत के साथ ही समाज के हर वर्ग की जरूरत क्या है? हम कुछ कर सकते हैं तो फिर करते क्यों नही? हमें आवाज़ उठानी ही होगी। वो दिन गए, जब राजनीति को अछूत मानकर हम चुप बैठ जाते थे, यहाँ तक कि मतदान के दिन भी निष्क्रिय रहते थे। वक्त आ गया है... जब जागे, तभी सवेरा।

13 comments:

Hari Joshi said...

चाटुकारों को सम्‍मान थोक में मिलते हैं और कलाकार के मरणोपरांत पारखी उनके काम को याद करते हैं। इसलिए आप चौदहवीं के इन चांदों से उम्‍मीद मत कीजिए।

Uday khaware said...

Achha laga mam......

U.S. Khaware
Dy news editor
abhi abhi
Gurgaon
(Haryana)

Mrs. Asha Joglekar said...

सरकार की कौन सी चीज पटरी पर होती है ?

विनय said...

ब्लोग का रंग बड़ा सोबर है!

---
गुलाबी कोंपलें

Abhishek said...

परिवर्तन की चाह में लोग इन कलाकारों को आजमाते है, मगर ये भी निराश ही करते हैं. अच्छा विषय उठाया आपने.
(Pls remove unnecessary word verification)

nupurdixit said...

apne sahi baat likhi hai uttama ji. hum rajniti ko achute mankar baith jaate hai. jab vakt haath se nikal jaata hai to narajgi jahir karte hai. abhi mouka bhi hai aur dasture bhi apne shabdo se isi tarah josh badate rahiye

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

पाँच वर्ष में दीवारों से, चित्र उतारे जाते हैं।

कुर्सी वाले नेता के ही, चित्र सँवारे जाते हैं।

निर्वाचन में सीधे-सीधे,इनपर करना चोट सही।

भ्रष्टाचारी नेताओ को, आगे करना वोट नही ।

संगीता पुरी said...

सही कह रही हैं आप .. हमें जगना ही चाहिए।

Ek ziddi dhun said...

आपकी चिंता तोवाजिब है पर ये कहना - हम कलाकार, साहित्यकार या रंगमंच के प्रतिनिधि जनता से सीधे जुडे हैं?

mahashakti said...

बेहतरीन

शीर्षक से सोचा था कविता होगी किन्‍तु यह लेख निकल गया :)

ajai rai said...

Loktantra men raja janata hoti hai. Janata apane pratinidhi chunti hai.
Hum Govinda ko chunte hain. Jayaprada, Siddhu, M.G.R., Jaylalita, Amitaabh ko jeet ki garanti dete hain. Inko aaraam se tikat milata hai. Jo rajaniti men hain unko janata ne hansi ka patra aur murkh maan liya hai. Isliye hamen unse jyada mafia par bharosa hai. Abtak desh ka PM, Rastrapati koi mafia ya Abhineta nahin hua. Phir bhi hamen unhi par etbaar kyon hai?
Sarkaari schoolon se padh kar docter, Officer bane logon ko kyon lagane laga ki convent schoolon men unke scoolon se behatar padhai hoti hai. Halat gabhir ho to mareej ko nursing home nahin lete. Unka ilaj sarkari hospital men nahin hota? Agar yah sach hai to hamne har achchhi cheej kachare men kyo dal di?
Atal Bihari ko PM banaya unka ghutana badalna pada to Videshi docter ko Padmsree mil gayee. Ab doctor sahab bhale hi kuch rupaye ki khatir Bhart (THE MOTHER)ko chhod gaye rahe hon. Anivasi ho gaye hon. BHARAT ke sapoot ban gaye.

ajai rai said...

Loktantra men raja janata hoti hai. Janata apane pratinidhi chunti hai.
Hum Govinda ko chunte hain. Jayaprada, Siddhu, M.G.R., Jaylalita, Amitaabh ko jeet ki garanti dete hain. Inko aaraam se tikat milata hai. Jo rajaniti men hain unko janata ne hansi ka patra aur murkh maan liya hai. Isliye hamen unse jyada mafia par bharosa hai. Abtak desh ka PM, Rastrapati koi mafia ya Abhineta nahin hua. Phir bhi hamen unhi par etbaar kyon hai?
Sarkaari schoolon se padh kar docter, Officer bane logon ko kyon lagane laga ki convent schoolon men unke scoolon se behatar padhai hoti hai. Halat gabhir ho to mareej ko nursing home nahin lete. Unka ilaj sarkari hospital men nahin hota? Agar yah sach hai to hamne har achchhi cheej kachare men kyo dal di?
Atal Bihari ko PM banaya unka ghutana badalna pada to Videshi docter ko Padmsree mil gayee. Ab doctor sahab bhale hi kuch rupaye ki khatir Bhart (THE MOTHER)ko chhod gaye rahe hon. Anivasi ho gaye hon. BHARAT ke sapoot ban gaye.

Anil Pusadkar said...

सहमत हूं आपसे।