
विवाद निपटा, अब तो छोड़िए सियासत और अपने भारत की टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा के निकाह का जश्न मनाइये। खुश होइये कि सानिया बेशक पाकिस्तान की बहू बनने जा रही हैं लेकिन खेलती रहेंगी अपने वतन के लिए और तो और... वो पाकिस्तान में रहेंगी भी नहीं। आम भारतीय हैं हम, क्यों सियासतदां बनने का दुष्प्रयास कर रहे थे। सिने स्टार रीना रॉय ने भी सानिया के भावी क्रिकेटर शौहर शोएब मलिक के हमपेशा मोहसिन खान को चुना था, तब बात आसानी से पच क्यों गई थी? मैं आगरा में थी तब एक मामला उछला था। एक पंजाबी लड़की ने मुस्लिम लड़के से निकाह कर लिया तो हिंदूवादी संगठनों ने ताल ठोक दी। लड़की के घर पर पहरा बैठा दिया गया, लड़के पर हमले तक हुए। एक डिग्री कॉलेज में खूब हंगामा हुआ जहां एक विधायक (अब पूर्व) की शह पर मेरिट में न होने के बावजूद तमाम मुस्लिम लड़कों के प्रवेश कर लिये गए थे। कहीं की भड़ास, निकली कहीं। तब यह आंकड़ा वहां आम हुआ कि कई मुस्लिम लड़कों ने हिंदू लड़कियों से निकाह किया है जबकि मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले हिंदू लड़कों की संख्या बेहद कम थी, यह हजम नहीं हो पा रहा था। हिंदूवादी कहे जाने वाले एक संगठन की तो लड़ाई ही इसीलिये है। पर सानिया के मामले में, हिंदूवादी ही उबल रहे हैं। हम दोगले क्यों हो जाते हैं ज्यादातर मामलों में? शोएब ने एक और हिंदुस्तानी लड़की आयशा सिद्दीकी से पहले निकाह किया था और फिर छोड़ दिया। पुलिस अपना काम कर रही थी और शोएब उसका सहयोग। पूछताछ कर ली गई थी। उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था। कहने का मतलब यह है कि कानून अपना काम कर रहा था और आरोपी भी भारत में रहकर कानून की मदद करने का ऐलान कर चुका था। शोएब अपना पक्ष खुलकर रख रहे थे, जबकि आयशा छिपकर और वकील के जरिए। उन्होंने सनसनीखेज इल्जाम लगाया कि वो गर्भवती हो गई थीं। इसके बाद उनका गर्भपात भी हुआ। वकील के मुताबिक वह डिप्रेशन में है। उसे डायबिटीज है, वजन बहुत बढ़ गया है। शोएब के झूठ ने मुझे बर्बाद कर दिया है इसलिए मैं सामने नहीं आ रही। मामला विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत था। किसी के व्यक्तिगत मामले में टांग अड़ाना कहां की मानवता है? हम शादी-ब्याह जैसे नितांत व्यक्तिगत मामलों में पंच क्यों बन जाते हैं? मतदाता हमारे उठाए मुद्दों को नकार देते हैं और सत्ता से धड़ाम हो जाते हैं पर मानते नहीं। कैसा सबक चाहते हैं हम? अरे, निकाह हुआ भी है तो तलाक का प्रावधान तो भारतीय कानून और इस्लामी नियम, दोनों में है। सानिया से निकाह करना है तो शोएब को आयशा को तलाक दे देते। और दे भी रहे हैं। मामले पर पर्दा जल्दी गिरना जरूरी था। पाकिस्तान से संबंधों पर भी इसका असर होने लगा था। दोनों तरफ की सियासत आमने-सामने आ रही थी। विवाद अभी भी थमेगा, इसमें शक है क्योंकि हिंदुस्तानी लड़की और पाकिस्तानी शौहर का मुद्दा तो जिंदा है कुछ लोगों के लिए लेकिन क्या चाहते हैं हम, हारी हुई सानिया? थकी और हताश सानिया? क्यों हम अपने एक खिलाड़ी का बेड़ा गर्क करने में तुले हैं?




