Thursday, August 12, 2010

जुड़ा रंगों का मेला

तूलिका का कमाल। रंगों का धमाल। कलाकारों में होड़। प्राकृतिक दृश्यों की भरमार। पेपर पर हरियाली की मार। एक से बढ़कर एक कलाकृति। चंदौली जिले में मुगलसराय स्थित नगर पालिका इंटर कालेज परिसर में रविवार 22 अगस्त को राज्य ललित कला अकादमी उप्र की ओर से आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में यह सब देखने को मिला। प्रकृति चित्रण पर आधारित प्रतियोगिता में कुल लगभग डेढ़ सौ कलाकारों ने भाग लिया। दो वर्गों क्रमश: 10 से 17 एवं 18 से 25 वर्ष के प्रतिभागी जुटे तो सर्वश्रेष्ठ कृति बनाने के लिए होड़ सी मच गयी। माध्यम था एक्रेलिक अथवा पोस्टर रंग। प्रतियोगिता की संयोजक बीएचयू स्थित दृश्यकला संकाय के चित्रकला विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. उत्तमा दीक्षित ने कहा कि नक्सल प्रभावित चंदौली जिले में नौगढ़ जैसे कई मनोरम प्राकृतिक स्थल हैं। यहां की कलाओं को प्रोत्साहन मिले तो नक्सलवाद जैसी समस्याओं का हल हो सकता है। निर्णायक मंडल में बीएचयू में दृश्य कला संकाय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आरएन मिश्र व एसोसिएट प्रोफेसर डीपी मोहन्ती शामिल थे। 29 अगस्त को सर्वश्रेष्ठ कृतियों की घोषणा की गई। दोनों वर्गों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। दोनों वर्गों में चुनी गईं 10 सर्वश्रेष्ठ कृतियों की लखनऊ में प्रदर्शनी आयोजित होगी। सभी प्रतिभागियों के चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन और पुरस्कार वितरण समारोह 29 अगस्त को इसी इंटर कॉलेज में सम्पन्न हुआ।

यहां देखें प्रतियोगिता का कवरेजः-
http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=40&edition=2010-08-23&pageno=9#

http://tewaronline.com/?p=465

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6641872.html


http://fineartakademiup.nic.in/home.htm

Thursday, August 5, 2010

सबको भाये फोक का लोक


मॉडर्न ड्रेसेज पर ट्रेडीशनल टाइप आर्नामेंट्स, वाह क्या कहने ! नए के साथ पुराने का ये तालमेल पर्सनेलिटी में अलग और अच्छा सा लुक देता है. कभी-कभी तो इनके सामने डायमंड और गोल्ड की ज्वेलरी भी मात खा जाती है. खास बात यह है कि जब चाहो, बदल लो. यंग जेनरेशन की तो खास पसंद हैं. आर्टिस्ट्स और आर्ट्स के स्टूडेंट्स के मैदान में आ जाने से यह हैंडीक्राफ्ट आइटम्स और भी मन मोह लेने लगे हैं. नई-नई तरह की अलग-अलग रंगों की ड्रेसेज से मैच करने वाले वुड, पेपर, स्टोन के साथ ही आयरन वायर्स, सिल्वर, कॉपर और ब्रास के ईयरिंग्स, नेकलेसेज, ब्रेसलेट्स, पैनडेंट्स जैसे कई तरह के यह हैंडीक्राफ्ट आर्नामेंट्स पर्सनेलिटी में चार चांद लगा रहे हैं.
ट्रेडीशनल आर्ट है हैंडीक्राफ्ट. पहले स्मॉल स्केल पर बना करती थी लेकिन अब फलने-फूलने के बाद इंडस्ट्री का रूप ले चुकी है. तमाम कलाकार अपनी कल्पनाओं को इसके जरिए आकार दे रहे हैं. स्टूडेंट्स के लिए भी इनकम का सोर्स है. मैं ऐसे कई स्टूडेंट्स को जानती हूं जिन्होंने प्लास्टिक आर्ट, स्कल्पचर और पॉटरी में ट्रेंड होने के बाद हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री का रुख किया. इसका असर हुआ, नई जनरेशन की क्रिएटीविटी और इमैजिनेशन ने हैंडीक्राफ्ट को भी बदल दिया. ट्रेडीशनल स्टाइल में ऐसे-ऐसे आर्नामेंट्स आ गए कि जैसे क्रांति ही हो गई. बाजारों में इतनी तरह के आइटम्स मिलने लगे हैं कि अपनी पसंद तय करने में ही घंटों लग जाएं. जो चाहिए, वो मिलेगा यहां. इमैजिनेशन का ही असर है कि कलाकार पुरानी और बेकार चीजों को डेकोरेटिव बना रहे हैं. कोई सोच सकता है कि वेस्ट पेपर की रिसाइकिलिंग करके भी सुंदर-सलोने आर्नामेंट्स बनते हैं? अलग-अलग रंगों के इस्तेमाल से बने यह आर्नामेंट्स इको फ्रेंडली तो हैं ही, एंटी एलर्जिक भी होते हैं. पानी में भीग जाएं तो कुछ देर रख दीजिए, सूखकर पहले जैसे हो जाएंगे. टेरोकोटा और हाथी दांत भी इस कला में योगदान दे रही है. वुड की वैराइटीज कमाल के आइटम्स बनाती हैं, जिससे पर्यावरण को भी ज्यादा खतरा नहीं होता. यूज की जाने वाली वुड ज्यादातर उन पेड़ों की होती है जो जल्दी और आसानी से उग आते हैं. इस परपज के लिए उन्हें अलग से उगा और यूज कर लिया जाता है. स्टोन्स के आइटम्स में कलर और साइज काम्बिनेशन न हो तो भी आकर्षक दिखते हैं.
सिल्वर वायर्स से बनी ज्वेलरी आंखें चौंधिया देती है. सिल्वर सिजरी नाम की यह आर्ट लाइट ज्वेलरी मार्केट में गोल्ड को पीछे छोड़ चुकी है. प्लास्टिक को मोल्ड करके भी यह आइटम बनते हैं, इससे फेंके जाने से एनवायरमेंट को नुकसान पहुंचाने वाली प्लास्टिक एक बार और काम में आ जाती है. दरअसल, सूरजकुंड हैंडीक्राफ्ट फेयर ने इस कला को नई मंजिल तक पहुंचाया है. नगरीय हाट जैसे लगभग हर शहर में लगने वाले हैंडीक्राफ्ट फेयर से यह और आसानी से रीच में आ गई. इसके साथ ही एक्सपोर्ट का करीब 17000 करोड़ का बाजार है, इसलिये इम्प्लायमेंट के मौके भी खूब हैं. तभी तो स्टूडेंट्स की भीड़ इस तरफ आने लगी है. स्कूल लेवल से ही क्राफ्ट की ट्रेनिंग से ग्रेजुएशन से नीचे के स्टूडेंट भी इस भीड़ में शामिल हैं. चीन से भी यह आइटम आ रहे हैं लेकिन इक्कीस हम हैं. आर्ट वर्ल्ड में हवा चलने के कारण हम वैराइटीज बना रहे हैं. इसका जबर्दस्त क्रेज है. देहरादून में एक दुकान पर अपने लिए खरीदते वक्त मैंने पूछा तो पता चला कि वहां रोजाना हजारों रुपये के यह आइटम बिकते हैं. इलाहाबाद के कला-कुंभ में आर्ट की तमाम वैराइटीज थीं पर सबसे ज्यादा भीड़ हैंडीक्राफ्ट स्टाल पर थी. आगरा में शिल्पहाट और लखनऊ हाट में फॉरेन टूरिस्ट भी खूब खरीददारी करते हैं. बनारस में दशाश्वमेध घाट पर हैंडीक्राफ्ट आर्नामेंट्स की हजारों-लाखों डिजाइन मिल सकती हैं. झुमके के लिए फेमस बरेली के बाजार भी इससे अटे पड़े हैं. यह क्रेज ही है कि इसे बनाने के बाद गर्ल्स खुद को रोक नहीं पातीं और पहनकर इठलाती घूमती हैं. झारखंड-बिहार में स्टोन आइटम्स ज्यादा बनते-बिकते हैं. आगरा के फतेहपुर सीकरी में राजस्थानी हैंडीक्राफ्ट का एक नेकलेस देखकर मैं खुद भी मचल सी गई थी. हर ऐसी दुकानों पर तमाम गर्ल्स और लेडीज को मैंने मचलते देखा है. यह एक आर्ट है इसलिये वो परवाह नहीं करतीं कि कौन-क्या सोचेगा? यह तो पुराना ट्रेंड है लेकिन नए लोगों के आने से इसमें नया और एक्साइटिंग लुक जरूर आ गया है.