Wednesday, January 5, 2011

अनीश कपूर का आर्ट वर्ल्ड

इमेजिन कीजिए कि गोले की जगह एक तोप रंग बरसाए और एक ब्यूटीफुल आर्ट आइटम रच दे. लोग आएं और उससे रंग भरे गोले दागें और दीवार पर अनूठा म्यूरल बना दें या फिर, यह बड़े मिरर में आप किसी शहर की इमेज देख पाएं. सचमुच, प्राउड फील होता है कि इंडियन ओरिजिन का एक आर्टिस्ट लंदन में ऐसी कलाकृति बना रहा है जिसकी तुलना फ्रांस की आइफिल टॉवर से की जा रही है. नवंबर 2011 में यह टॉवर बनकर तैयार हो जाएगी यानि नए साल में हम इंडियन्स की सक्सेस स्टोरीज़ में एक पन्ना और जुड़ने वाला है. यह आर्टिस्ट जो जो-जो रच रहा है, वो आर्ट की हिस्ट्री में कभी देखने को नहीं मिला.
इस बार मैं लंदन बेस्ड इंडियन अनीश कपूर की बात करने जा रही हूं. हाल ही में अनीश की दिल्ली की नेशनल गैलरी आफ मॉडर्न आर्ट और मुंबई के महबूब स्टूडियो में एक्जीबिशन हुई. यह वही आर्टिस्ट हैं तीन साल पहले जिनकी एक पेंटिंग आक्शन कंपनी सॉदबी ने 28 लाख डॉलर में बेची थी. वहां 2012 में होने वाले ओलंपिक गेम्स को यादगार बनाने के इरादे से दो करोड़ पाउंड की लागत से बन रही एक खास मीनार को डिजाइन करने वाले स्क्ल्पटर यही हैं. इसका नाम होगा आर्सेलर मित्तल ऑर्बिट. 115 मीटर ऊंची इस लोहे की मीनार के लिए पैसा इंडियन इंडस्ट्रिलिस्ट लक्ष्मीनिवास मित्तल देंगे और इसकी डिजाइन बनायी है अनीश ने. स्ट्रेटफर्ड एरिया में ओलंपिक स्टेडियम के पास बन रहे गीज़ा के पिरामिड जितनी हाइट वाले टॉवर पर दो रेस्त्रां होंगे और दो लिफ्टों से हर घंटे 700 लोग ऊपर बने पैवेलियन पर जा सकेंगे. इसमें 1400 टन स्टील यूज होगी. गर्व की बात यह भी है कि एंटनी ग्राम्ली जैसे मशहूर शिल्पकार इसे बनाने की रेस में शामिल थे. अनीश हिस्ट्री रच रहे हैं. उनकी आर्ट में वो एक्पेरिमेंट्स हैं जो पहले कभी नहीं हुए. उनका एक और वर्क एक मिरर है जो स्टील की बड़े साइज ट्रांस्पेरेंट लेयर्स से बना है जिन पर पॉलिश की गई है. दस मीटर डायमीटर के इस मिरर का वेट 23 टन है. इसे वह कई शहरों में एक्जीबिट कर चुके हैं. उन्हें 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमलों में मारे गए ब्रिटिशर्स की याद में एक मॉन्यूमेंट बनाने का भी काम सौंपा गया है. करीब साढ़े 19 फुट की यूनिटी नामक इस आकृति को हनोवर चौक के स्मारक पार्क में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा. यह चौक न्यूयॉर्क के दो टॉवरों के नजदीक है. अनीश को स्थान और सामग्री के बेहतर कांबिनेशन के लिए जाना जाता है. आर्ट क्रिटिक्स मानते हैं कि उनकी कृतियों में द्वंद्वात्मक विशेषता झलकती है, जैसे प्रजेंस बनाम एब्सेंस, एक्चुअल बनाम इमेजनरी आदि. एक्जीबिशन के समय दिल्ली की गैलरी में अनीश पर चल रही एक डॉक्यूमेंटरी से मुझे भी पता चल रहा था कि एक आर्टिस्ट का इमेजिनेशन कहां-कहां तक पहुंच सकता है. मैनहट्टन के इंस्टॉलेशन में उन्होंने एक तोप रखी, जिसमें रंगों से भरे गोले लोड किए जाते और दर्शक आते और उन्हें दागते. इसके बाद दीवारों पर रंगों का एक अजूबा म्यूरल उभर आता. इंडियन विजुअल आर्ट में ‘ऐतिहासिक और पारंपरिक कलाओं’ की जगह ‘पॉप कल्चर और एब्स्ट्रेक्ट आर्ट’ का फेवर लेने वाले मुंबई में जन्मे इस आर्टिस्ट ने मिरर्स का कई बार यूज किया है. उनकी कृति सी मिरर में प्लेटफॉर्म पर लगे एक मिरर से समुद्र का नज़ारा दिखता है. मिरर हेवेन में अनूठी इमेजेस रची गई हैं. टेमेनॉस में उन्होंने समुद्र किनारे बनाए इंस्टॉलेशन में एक नेट को आयरन पोल पर कसा गया है. अनीश ने आर्ट की डेफिनेशन को ही बदल दिया है, उनकी विशाल कृतियों में आर्ट के साथ आर्किटेक्चर घुलामिला है. गैलरी में रखी कमेंट बुक बता रही थी कि उनसे इंप्रीरेशन ले रही नई जेनरेशन के पास भी ऐसे आईडियाज हैं. मतलब यह है कि अनीश जैसों के शुरू किए एक्पेरिमेंट्स का सिलसिला लंबा चलेगा जो आर्ट वर्ल्ड के लिए आनंद की वजह बनता रहेगा.

यहां देखें मेरा यह आलेखः-
http://www.inext.co.in/epaper/inextDefault.aspx?pageno=16&editioncode=1&edate=1/5/2011

1 comment:

Arvind Mishra said...

इस मानुमेंटल कला शिल्पी और उसके शुल्प से परिचय कराने के लिए शुक्रिया !