Sunday, November 2, 2008

उन्माद का अधिकार


कला ने यहाँ जीवन के तनाव को कम करने का रास्ता दिखाया है। आई आई टी कानपुर में देशभर के 100 बड़े कॉलेज के सैकडों स्टूडेंट्स जुटे, मौका था अंतराग्नि 2008 का। थीम रखा गया Right to insanity यानी उन्माद का अधिकार। स्टूडेंट्स ने बखूबी दिखाया कि उन्माद या पागलपन का पोसिटिव उपयोग कैसे उन्नति के नए रास्ते खोल सकता है। विजुअल आर्ट्स वर्ग में जो पेंटिंग्स बनाई गई उनमे जीवन का हर रंग था, लगा ही नहीं कि इंजीनियरिंग की कठिन पढ़ाई करने वाले कला का भी मैदान मार सकते हैं। एक पेंटिंग में मायूस सा दिखने वाला चेहरा एक दर्शक को पसंद नहीं आया और उसने अपनी कलम से उसे हँसता हुआ दिखने का प्रयास कर डाला। मैंने वजह पूछी, तो जवाब मिला- जिंदगी में बहुत तनाव है, कला से तो राहत का एहसास हो। एक से बढ़कर एक पेंटिंग्स दिखाई दी यहाँ। थेर्मकोल से इन कलाकार स्टूडेंट्स ने अजब-गजब रचनाएँ की। तीन दिन के इस महोत्सव में बहुत-कुछ उल्लेखनीय था। आधुनिकता के रंग में रंगे यह स्टूडेंट्स कला के भी कम उस्ताद नहीं लगे। कला और संस्कृति के इस मेले में करीब 13 लाख के इनाम बांटे गए। स्टूडेंट्स ने आपस में बहुत-कुछ बांटा भी। आफताब अहमद खान ने बताया कि कैसे उन्माद का सार्थक उपयोग हो सकता है। मुंबई पुलिस के पूर्व अफसर आफताब पर ही मुम्बइया फ़िल्म Shootout at lokhandwala बनी है। पुलिस अफसर होने के नाते उनका ऐसे उनमादिओं से सामना खूब हुआ है। स्टूडेंट्स ने भी अपने तर्क-सुझाव रखे। सार्थक रहा अंतराग्नि, एजूकेशन फील्ड में ऐसे आयोजन उम्मीद पैदा करते हैं।

1 comment:

satyendra... said...

निश्चित रूप से इससे उम्मीद की किरण जगती है। तकनीकी जानकारी के मामले में दुनिया में अपना लोहा मनवाने वाले अब कला के माध्यम से शांति का संदेश दे रहे हैं। बेहतरीन विचार है। हो सकता है कि उन्हीं में से कोई युवक ओबामा निकल आए, जो सड़ती हुई भारतीय राजनीति को भी दिशा दे दे।